बैंक में आए 3 लाख रुपए के नकली लोट
राजधानी में बढ़ा नकली नोटों का चलन, मामला दर्ज़
भोपाल(नप)। राजधानी में नकली नोटों की आवक बढ़ती ही जा रही है। लेकिन पुलिस इस दिशा में बिल्कुल सुस्त दिख रही है। आईसीआईसीआई बैंक ने करीब 6 माह की अवधि में बैंक में आए लाख रुपए से ज्यादा के नकली नोट जमा कर पुलिस को हैरत में डाल दिया है। इससे बाजार में बड़े पैमाने पर नकली नोटों के चलन की आशंका को बल मिला है। िफलहाल पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ मामला कायम कर लिया है। लेकिन लाख टके का सवाल यह है कि नकली नोटों के असल तस्करों तक पुलिस के हाथ क्यों नहीं पहुॅंच पा रहे हैं। एमपी नगर पुलिस के मुताबिक आईसीआईसीआई बैंक की सूचना पर अलग-अलग कीमत की कुल 784 नोट बरामद की गई है। बैंक ने इन्हें नकली नोट बताया है। हैरत में डालने वाली बात तो ये है कि इसमें पॉंच सौ रुपए की नकली नोट की संख्या 468 है। ऐसे ही हजार रुपए की भी 62 नोट को नकली बताया गया है। सौ रुपए की 228 नोट और 50 रुपए की 25 नोटों को बैंक ने नकली बताया है। इसके अलावा 20 रुपए की केवल एक नोट नकली होना पाई गई है। इसमें कुल 3 लाख 20 हजार रुपए की नकली नोट होना बताया गया है।
साल भर पहले दी थी सूचना:बैंक में करेंसी शाखा की प्रभारी निहारिका पाण्डे ने 21 दिसंबर 2008 को पुलिस अधीक्षक जयदीप प्रसाद को नकली नोटों की जानकारी का आवेदन दिया था। लेकिन साल भर बाद पुलिस हरकत में आई। अब जाकर अज्ञात आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिंता की धारा 489 (क) के तहत मामला कायम किया गया है।
कहॉं से आ रहे हैं नकली नोट?ये पहला मौका नहीं है जब बैंक ने पुलिस को नकली नोट सौंपे हैं। इससे पहले भी रिजर्व बैंक के माध्यम से पुलिस ने बड़ी संख्या में नकली नोट बरामद किए हैं। लेकिन पुलिस अब तक यह पता नहीं कर पाई है कि नकली नोटों को बाजार में चलन में लाने के इस गोरखधंधे को कौन लोग अंजाम दे रहे हैं। माना जा रहा है कि इतनी कम अवधि में बैंक की एक शाखा में यदि इतनी बड़ी तादाद में नकली नोटों की आवक हुई है तो िफर अन्य वित्तीय प्रतिष्ठानों में क्या हाल होगा?
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गरीब के नाम से ले लिया 10 लाख का लोन
बैंक मैनेजर और बिल्डर ने किया कारनामा
भोपाल(नप्र)। मैसूर बैंक में दस्तावेजों में हेराफेरी कर 10 लाख रुपए की लोन की रकम हड़पने का मामला उजागर हुआ है। फरियादी को मामले का पता तब चला जब कुछ महीने पहले उसके घर बैंक का कर्मचारी लोन का ब्याज जमा करने की नोटिस लेकर आया। नोटिस देखकर फरियादी के होश फाख्ता हो गए। उसने पुलिस को इस बात की शिकायत की। शिकायत की जॉंच के बाद पुलिस ने बैंक अफसर, बिल्डर और एक शातिर दलाल के खिलाफ मामला कायम कर लिया है। गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले फरियादी ने अपने परिचितों के साथ भी ऐसी ही हेराफेरी की आशंका जताई है। ऐशबाग पुलिस के मुताबिक करोंद हाऊसिंग बोर्ड निवासी साजिद अहमद ने शिकायत की है कि नवंबर 2008 में उसे 25 हजार रुपयों की जरुरत थी। तब उसकी मुलाकात बैंक में दलाली करने वाले संजय जौहरी से हुई थी। जौहरी ने उसे लोन दिला देने का भरोसा दिलाया था। जौहरी को उसने कुछ दस्तावेज भी दिए थे। लेकिन उसे लोन के नाम पर एक रुपया भी नहीं मिला। लेकिन 5 मई 2009 को उसके घर मैसूर बैंक का एक कर्मचारी नोटिस लेकर दाखिल हुआ। उसने 10 लाख रुपए के लोन का ब्याज चुकाने की बात कही। साजिद ने जब बैंक में जाकर पूछताछ की तो शाखा प्रबंधक ने भी इस बात की पुष्टि की। प्रबंधक की बात सुनकर साजिद के पैरों तले जमीन खिसक गई। उसने शिकायत में बताया है कि वह गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करता है और 10 लाख रुपए का लोन लेने की बात वह सपने में भी नहीं सोच सकता। आवेदन की जॉंच के बाद पुलिस ने इस मामले में बैंक के तात्कालिन शाखा प्रबंधक एएस हेगड़े, फील्ड ऑिफसर रविन्द्र कुमार और बिल्डर पुष्पेन्द्र मिश्रा के साथ दलाल संजय जौहरी और बंटी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला कायम किया है।
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आग लगने से मारुति खाक, सवार थे स्कूली बच्चे
भोपाल। मिसरोद इलाके में वृंदावन गार्डन के पास गुरुवार सुबह एक बड़ा हादसा टल गया। बच्चों को छोड़ने स्कूल जा रही एक मारुति जलकर राख हो गई। आग का कारण स्पाकिoंग बताया जा रहा है। मारुति में गैस कीट लगी थी। हालांकि समय रहते ड्रायवर अैर बच्चे आग देखकर सुरक्षित बाहर आ गए थे। देर शाम तक गाड़ी के मालिक का पता नहीं चल पाया है। मिसरोद पुलिस के मुताबिक स्कूली बच्चों को छोड़ने जा रही एक मारुति में सुबह 7 बजे लगभग अचानक आग लग गई। आग देखकर ड्रायवर और बच्चे तुरंत सुरक्षित बाहर आ गए। इससे पहले की ड्रायवर आग पर काबू पाने की कोशिश करता, मारुति पूरी तरह जलकर राख हो गई। आग इतनी भीषण थी कि पुलिस गाड़ी का नंबर तक नहीं देख पाई। गाड़ी के चेचिस नंबर से उसके मालिक का पता किया जा रहा है। दोषी पाए जाने पर गाड़ी मालिक के खिलाफ मामला कायम किया जाएगा।
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