प्रशासन और मोटरमालिक कर रहे पर्यावरण से खिलवाड़
4 सालों से बंद हैं 27 प्रदूषण जॉंच केन्द्र
भोपाल। राजध्ाानी की सड़कों पर दौड़ने वाले वाहन जहर उगल रहे हैं और प्रशासन हाथ पर हाथ ध्ारे बैठा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की मॉनीटरींग में भी पुराने और डीजल वाहनों के द्वारा बेतहाशा प्रदूषण फैलाने की बात उजागर हो गई है। बावजूद इसके न तो यातायात पुलिस और न ही आरटीओ जहरीला ध्ाुऑं उगलने वाले वाहनों पर कार्रवाई करने तैयार हैं। कार्रवाई की बात पर यातायात पुलिस इसके लिए आरटीओ को जिम्मेदार ठहराती है। हालात इतने बदतर हो गए हैं कि वाहनों के प्रदूषण की जॉंच के लिए बने 27 केन्द्र बीते 4 सालों से बंद पड़े हैं। प्रदूषण फैलाने पर जब कार्रवाई ही नहीं हो रही है तो वाहन मालिकों ने प्रदूषण जॉंच करवाना भी बंद कर दिया है। केन्द्रीय मोटरयान नियम 1989 के नियम 62 में इस बात का प्रावधान है कि वाहनों को िफटनेस के लिए प्रदूषण जॉंच में खरा उतरने का प्रमाण पत्र हासिल करना होगा। इसी प्रावधान के तहत 30 जनवरी वर्ष 2001 को मध्यप्रदेश सरकार के परिवहन विभाग ने मोटरयान के प्रदूषण की जॉंच के लिए प्रदूषण जॉंच केन्द्र को अधिकृत करने संबंधी योजना लागू की। इसके तहत वाहनों की संख्या के अनुपात में हर जिले में प्रदूषण जॉंच केन्द्रों की स्थापना किया जाना तय था। उक्त नियम में यह भी तय किया गया था कि प्रमाण पत्र देने के लिए तंत्र कैसे काम करेगा और कौन प्राधिकृत होगा। यह नियम पूरे प्रदेश में एक साथ लागू किया गया था। लेकिन राजधानी में ही जब नियमों की परवाह नहीं की जा रही है तो अन्य जिलों में स्थिति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।
प्राधिकार पत्र पाने की अहर्ता:: आवेदक के पास मेकेनिकल/ ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग की डिग्री, आईटीआई का डिप्लोमा या समकक्ष योग्यता हो: मोटरयान से उत्सजिoत होने वाले धुॅंएं की जॉंच की लिए स्मोक मीटर, गैस एनालाइजर और वाहनों की ट्यूनिंग के लिए आवश्यक उपकरण हों।
कलेक्टर करेंगे चयन:जॉंच केन्द्र का प्राधिकार देने के लिए परिवहन अधिकारी के माध्यम से अखबारों में विज्ञापन दिया जाएगा। वाहनों की संख्या के लिहाज से केन्द्रों की संख्या तय होगी। प्राधिकार पत्र जारी करने के लिए आवेदक का चयन संबंधित जिले के कलेक्टर करेंगे।
तीन वर्ष तक के लिए होगा वैध:नियम के तहत जॉंच केन्द्रों के प्राधिकार की कालावधि तीन वर्ष के लिए होगी।। कलेक्टर इसे एक वर्ष के लिए नवीनीकृत कर सकेंगे। नियम के तहत यह भी तय किया गया था कि वाहन की क्षमता के अनुरुप प्रदूषण जॉंच केन्द्र वाहन मालिकों से कितना शुल्क लेंगे।
पुराने और डीजल वाहन फैला रहे प्रदूषणराज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा अगस्त 09 में लाल घाटी चौक और प्रभात पेट्रोल पंप चौराहे पर वाहनों के उत्सर्ज़न की जांच की गई थी। बोर्ड से प्राप्त जानकारी के अनुसार वाहनों की उत्सर्ज़न जांच में सबसे ज्यादा डीजल वाहन प्रदूषण फैलाते पाए गए। इस दौरान 25 डीजल वाहनों की जांच की गई। इनमें से 13 वाहन (52 फीसदी) निर्धारित मानदंडों से ज्यादा उत्सर्ज़न करते पाए गए। पेट्रोल से चलने वाले 16 चार पहिया वाहनों की जांच में भी मानक से अिध्ाक उत्सर्ज़न करने वाले वाहन मिले। इसी प्रकार 64 दो पहिया वाहनों की जांच में भी प्रदूषण फैलाने वाले 5 वाहन मिले थे।
जरुरत ही नहीं तो क्यों कराएॅ जॉंच:नियमों के मुताबिक तो प्रदूषण जॉंच में खरा उतरने का प्रमाण पत्र अनिवार्य है लेकिन जब प्रमाणपत्र के अभाव में कार्रवाई ही नहीं होती और न ही परमिट लेने में कोई दिक्कत आती है, तो िफर कोई क्यों प्रदूषण जॉंच करवाएगा। आसानी से परमिट मिल जाने और कार्रवाई न होने के कारण हीे वाहन चालकों ने प्रदूषण जॉंच करवाना बंद कर दिया। जब जॉंच के लिए वाहन आने ही बंद हो गए तो जॉंच केन्द्र भी स्वत: ही बंद हो गए।
`इस मामले में आरटीओं की जिम्मेदारी बनती है। वह ऐसे वाहनों को परमिट ही क्यों जारी कर रहे हैं। हम से ही कार्रवाई की अपेक्षा क्यों की जाती है, आरटीओ की कोई जिम्मेदारी नहीं बनती क्या! प्रदूषण जॉंच के प्रमाणपत्रों के बिना परमिट कैसे जारी हो रहे हैं।´ एसएस लल्ली, उपपुलिस अधीक्षक, यातायात
`नियमों के मुताबिक तो वाहन को प्रदूषण जॉंच में खरा उतरने का प्रमाण होना चाहिए। लेकिन ऐसा क्यों नहीं हो पा रहा है, इसे दिखवाना पड़ेगा।´
क्ष्ोत्रीय परिवहन अिध्ाकरी, आरआर त्रिपाठी
नप्र: योगेश पाण्डे
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