गुरुवार, 22 अक्टूबर 2009

राजध्ाानी यातायात एक नजर:
प्रमुख चौराहे: रॉयल माकेoट चौराहा: 2000 पीसीयूजीएडी चौराहा: 2000 पीसीयूलालघाटी चौराहा: 1500 पीसीयू प्रति घंटा----------------------------प्रमुख चौराहे: यातायात का दबावरोशनपुरा चौराहा: 3000 पीसीयू राजभवन चौराहा: 1500 पीसीयू पुलिस कंट्रोल रुम चौराहा: 2000 पीसीयूलिली टॉकीज चौराहा: 2000 पीसीयू प्रति घंटे व्यस्ततम समय में
पुलबोगदा : ट्रैिफक दबाव 2500 पीसीयू प्रति घंटे
भारत टॉकीज चौराहा: 3000 पीसीयू प्रति घंटेरेलवे स्टेशन चौराहा: 2500 पीसीयू प्रति घंटेबसस्टेण्ड चौराहा: 300 पीसीयू प्रति घंटे
ट्रैिफक का दबाव:हबीबगंज स्टेशन के सामने 1500 पीसीयू प्रति घंटेबोर्ड आिफस में 2500 पीसीयू प्रति घंटेसुभाष नगर फाटक: 1500 पीसीयू प्रति घंटे(पीक घंटों में )
बेतरतीब यातायात अब राजध्ाानी की बड़ी समस्या बन गया है। शहर में 4 लाख 50 हजार दो पहिया वाहन, डेढ़ लाख चार पहिया और दस हजार से ज्यादा ऑटो हैं। इसके बाद 700 मिनी बसें राजध्ाानी की सड़कों पर पूरे समय ध्ाींगामुस्ती मचा रहे हैं। स्कूल बस के नाम पर हजार बसें दौड़ रही है। लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं है। यातायात पुलिस का कहना है कि वाहनों पर चालानी कार्यवाही से दुघoटनाओं पर लगाम लगाना संभव नहीं है। इसके पीछे तर्क ये है कि 1986-87 में पूरे प्रदेश में एक लाख चालान हुए थे और 1100 लोगों की सड़क दुघoटना में मौत हुई थी। जबकि पिछले साल 30 लाख से ज्यादा चालान काटे गए लेकिन 5700 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। अकेले राजध्ाानी में वर्ष 2007 में 254 लोगों की मौत हो गई जबकि वर्ष 2008 में 279 लोग सड़क हादसे में शिकार हो गए।

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