बहरा बना रहे हैं ऑटो रिक्शा
भोपाल। राजधानी में हजारों ऐसे ऑटो रिक्शा हैं, जो राहगीरों को बहरा बना रहे हैं। सड़क पर शोर मचाने वाले ये ऑटो रिक्शा और अन्य वाहन इंसान के मानसिक स्वास्थ्य पर भी विपरित असर डाल रहे हैं। बावजूद इसके न तो यातायात पुलिस शोर मचाने वाले वाहनों के खिलाफ कारगर कदम उठा रही है न ही परिवहन विभाग उन्हें परमिट जारी करने के दौरान इन बातों की पड़ताल कर रहा है।
अनुमान के मुताबिक राजधानी की सड़कों पर 10 हजार से ज्यादा ऑटो रिक्शा दौड़ रहे हैं। ऑटो चालक अपने वाहन का पिकअप बढ़ाने के लिए सायलेंसर से छेड़छाड़ कर रहे हैं। ऐसे में इन ऑटो रिक्शा का शोर अन्य राहगीरों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है। केन्द्रीय मोटर यान नियम में सभी वाहनों के लिए उत्सजिoत ध्वनि के मानक तय कर दिए गए हैं। बावजूद इसके किसी को भी इस बात की परवाह नहीं है। यातायात पुलिस इस मामले में जिला परिवहन अधिकारी के साथ उन लोगों को भी जिम्मेदार ठहरा रही है जो मानक से ज्यादा ध्वनि उत्सजिoत करने वाले यंत्र बना रहे हैं। पुलिस खुद भी दोषी ऑटो चालकों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रही है।
नहीं है डेसीमल मीटर:
राजधानी पुलिस के पास ध्वनि प्रदूषण मापने के लिए जरुरी डेसीबल मीटर ही नहीं है। ऐसे में ध्वनि प्रदूषण करने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई का अंदाजा लगाया जा सकता है।
नियम 119 में प्रतिबंधित है प्रेशर हार्न:
केन्द्रीय मोटरयान नियम 119 में इस बात का साफ उल्लेख है कि वाहनों में मल्टीटोनर और प्रेशर हार्न लगाया जाना प्रतिबंधित होगा।
नियम 120 में है मानक ध्वनि का उल्लेख है:
केन्द्रीय मोटरयान के नियम 120 में सभी वाहनों के लिए अधिकतम ध्वनि का उल्लेख है। इससे ज्यादा ध्वनि होने पर वह शोर होगा।
अधिकतम ध्वनि:
दो पहिया वाहन: 80 डेसीमल
4 पहिया वाहन: 82 डेसीमल
व्यवसायिक वाहन: 85 डेसीमल
भारी ट्रक : 90 डेसीमल (अधिकतम ध्वनि)
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मेरी समस्या जोधपुर जिले में 235 मैरिज होलों में होने वाले ध्वनि प्रढूषण पार्किंग समस्या झूठन से बदबू और गाडियों से उड़ने वाली धूल से घरों में आना आदि .
जवाब देंहटाएंइसके लिए मैने जोधपुर हाईकोर्ट में एक याचिका सी डब्लू १२३७/२००८ लगाई.
मेरी टिपणी
ध्वनि प्रदूषण नियम २००० में ५५ डी बी से अधिक ध्वनि पर पूर्णतया रोक हैं क्यों ना ५५ डी बी से अधिक ताकतवर म्यूजिक सिस्टम पर भी पूर्णतया रोक लगा देनी चाहिए
म्यूजिक सिस्टम के दुकानदार को प्रदूषण बोर्ड से अनुग्यापत्र लेने के लिए पाबंध करना चाहिए और वही म्यूजिक सिस्टम काम में लेना चाहिए जो प्रदुषण बोर्ड से जाँच करवाया गया हो.
हर थाने में ध्वनि मापक यंत्र होना चाहिए
थाने में ध्वनि निवारक टीम होनी चाहिए जो लोगों की शिकायत पर मौका जाँच करे म्यूजिक सिस्टम बोर्ड द्वारा पास किया हुआ ना होने पर भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता के तहत शख्त कारवाही कर सके.
ओम प्रकाश सुथार
नागौरी गेट के बाहर
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